ज्योति की बहादुरी के कायल हुए पीएम मोदी, लॉकडाउन में पिता को साइकिल पर बिठाकर गुरुग्राम से पहुंची थी गांव, डोनाल्ड ट्रंप की पुत्री इवांका ट्रंप ने भी की थी तारीफ

63

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को साइकिल गर्ल के नाम से विख्यात दरभंगा की बेटी ज्योति कुमारी की बहादुरी की जमकर तारीफ की। कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी भवन में आयोजित वर्चुअल संवाद में प्रधानमंत्री ने कहा कि ज्योति ने अपने बीमार पिता को साइकिल से गुरुग्राम से गांव लाकर बहादुरी की मिसाल पेश की है। कोरोना संकट में लॉकडाउन के दौरान दरभंगा की इस साहसी बेटी ने अपने बीमार पिता को साइकिल पर बिठाया और हरियाणा के गुरुग्राम से 1200 किमी की दूरी तय करते हुए सिंहवाड़ा प्रखंड के सिरहुल्ली गांव पहुंची थी।

अत्यंत निर्धन परिवार की, लेकिन हिम्मत की धनी ज्योति का चयन प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2021 के लिए किया गया है। वर्चुअल मुलाकात में प्रधानमंत्री के मुंह से तारीफ से गदगद ज्योति ने कहा कि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि देश के प्रधानमंत्री से उसकी वर्चुअल मुलाकात होगी। ज्योति की आंखों की चमक और चेहरे की मुस्कान उसके हौसले और आत्मविश्वास की गवाही दे रही थी।

राष्ट्रीय बाल पुरस्कार की विभिन्न श्रेणियों में ज्योति का चयन बहादुरी के लिए किया गया है। ज्योति को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने दिल्ली जाना था, लेकिन कोरोना के कारण इस पुरस्कार के लिए चयनित बच्चों को दिल्ली नहीं बुलाकर वर्चुअल संवाद में पुरस्कार की घोषणा की गयी। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इन बच्चों के काम की तारीफ की। ज्योति को प्रधानमंत्री की ओर से एक लाख रुपए का चेक, प्रमाणपत्र और मेडल दिया जाएगा। वर्चुअल संवाद में प्रधानमंत्री को देशभर के 32 बच्चों से बात करनी थी। लेकिन समय के अभाव में ज्योति से उनकी सीधी बात नहीं हो पायी। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने दरभंगा की इस साहसी बेटी की जमकर तारीफ की।

बता दें कि जिले के सिंहवाड़ा प्रखंड के सिरहुल्ली गांव की रहने वाली ज्योति कोरोना काल में गत 16 अप्रैल को बीमार पिता को गुरुग्राम से साइकिल पर बिठाकर अपने गांव लायी थी। उसकी इस बहादुरी की देशभर में खूब सराहना हुई थी। यहां तक कि अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पुत्री इवांका ट्रंप ने भी ट्वीटर पर ज्योति की बहादुरी की तारीफ की थी।

पिता को सुरक्षित घर पहुंचाने की ठानी
ज्योति ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उसने बीमार पिता की जान बचाने के लिए उन्हें सुरक्षित घर लाने की ठानी थी। राष्ट्रीय पुरस्कार और प्रधानमंत्री से वर्चुअल मुलाकात से उसे ऐसी खुशी मिल रही है, जिसे वह बता नहीं सकती। प्रधानमंत्री से सीधी बात नहीं होने का मलाल तो जरूर है, पर उन्होंने मेरी तारीफ की और मुझे पुरस्कार देने की घोषणा की, मेरे लिए यही बहुत बड़ी बात है। यदि फिर कभी मौका मिला तो मैं प्रधानमंत्री से जरूर बात करूंगी।

गौरवान्वित महसूस कर रहे पिता
वर्चुअल संवाद में ज्योति के साथ आए उसके पिता मोहन पासवान ने कहा कि बेटी को पुरस्कार देने घोषणा और वर्चुअल संवाद में शामिल होने पर गर्व महसूस कर रहा हूं। कभी नहीं सोचा था कि हमें इस तरह के कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिलेगा। आज हमें जो सम्मान मिला है, उससे काफी अच्छा लग रहा है। बेटी ने मेरी जान बचायी है, यह हमारे लिए गौरव की बात है।