इतिहास में पहली बार एक साथ 38 आतंकियों को फांसी,11 दोषियों को आजीवन कारावास

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नई दिल्ली। हमदाबाद में 2008 में हुए सीरियल ब्लास्ट के मामले में स्पेशल कोर्ट ने 38 आतंकियों को फांसी की सजा और 11 दोषियों को अजीवन कारावास की सजा सुनाई है इतिहास में पहली बार एक साथ इतने लोगों को फांसी की सजा दी गई है। धमाकों को अंजाम देने वाले आतंकी बेहद शातिर किस्म के हैं। वे न सिर्फ हाईटेक WIFI का इस्तेमाल करते थे, बल्कि कॉल करने के बाद फोन बंद कर लेते थे। 26 जुलाई 2008 को गुजरात के के अहमदाबाद में सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे। आपको बता दे कि इस हादसे में ये तीन आरोपी प्रमुख है इमरान, अतीकुर रहमान और महेंदी हसन अंसारी। आइए जानते हैं किस तरह इस टेरर मॉड्यूल का खुलासा हुआ और इन्हें कैसे गिरफ्तार किया गया।

इमरान पकड़े जाने से पहले पाटनपोल में मेडिकल स्टोर चलाता था। इस दौरान ही वो सिमी से संपर्क में आया। उसके परिवार में मां-बाप और भाई है। पिता सरकारी नौकरी में थे। जयपुर ब्लास्ट के तार भी इमरान से जुड़े थे। दरअसल, जयपुर में पकड़े गए एक आतंकी से इमरान का इनपुट मिला था। इसके बाद किशोरपुरा से उसे पकड़ा गया।

दूसरा दोषी अस्पताल के सामने लगाता था दुकान
वहीं, दूसरे आतंकी मेहंदी हसन अंसारी के बारे में पता चला कि वो घंटाघर इलाके का रहने वाला है। उसके परिवार को फोन कर बात करने की कोशिश की तो उन्होंने भी मना कर दिया। उनका कहना था कि जो होना था हो गया। पुरानी बात छेड़ने से क्या होगा। दरअसल, सिमी से लिंक सामने आने के बाद ही अंसारी को पकड़ा गया था।

अंसारी नयापुरा में जेके लोन अस्पताल के सामने नाश्ते की दुकान लगाता था। सिमी के संपर्क में कैसे आया, इसका जवाब उसके परिवार के पास भी नहीं था। पूछने पर उन्होंने बताया कि पुलिस ने सिमी से लिंक के चलते पकड़ा है। बाद में ब्लास्ट केस में इन्वॉल्वमेंट निकला। वहीं, अतीकुर रहमान को नांता इलाके से पकड़ा गया।

कोटा का सिमी कनेक्शन
ये पहली बार नहीं था कि कोटा से आतंकी पकड़े गए। सिमी संगठन से लिंक के कई मामले सामने आ चुके हैं। अगस्त 2008 में कोटा से तीन, बारां से 3 लोगों को पकड़ा गया। इन्हें राजस्थान की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम ने हिरासत में लिया था। इनमें पिता-पुत्र भी शामिल थे। इशाक और उसके बेटे सलीम सहित इन तीनों पर जयपुर धमाकों के आरोपी सलीम को रुकवाने का आरोप था। 2008 में ही मुनव्वर नाम के युवक को पकड़ा था। जिस पर धमाकों के मुख्य आरोपी साजिश मंसूरी को पनाह देने का आरोप था। 2014 में कोटा के इंद्र विहार से एक और सिमी कार्यकर्ता को पकड़ा गया। मोहम्मद उमर नाम का ये लड़का कोटा में एक हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। पढाई की आड़ में सिमी नेटवर्क को फैला रहा था। वहीं पिछले साल सितंबर में कोटा रेलवे स्टेशन से जान मोहम्मद नाम के आतंकी को दिल्ली पुलिस ने पकड़ा था।