सर्पदंश से वाल वाल बची बाल विकास परियोजना पदाधिकारी व कर्मचारी, वाल विकास परियोजना कार्यालय में निकला विषैला साँप

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सारण बिहार: सोनपुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय भवन के एक रूम में चल रहे बाल विकास परियोजना कार्यालय इन दिनों सांप बिच्छू सहित विषैले कीड़े मकोड़ों के शरण बसेरा बन गया है। भवन के चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य स्थापित हो गया है। कार्यालय के आसपास सर्वत्र जंगली, घास होने के कारण सांप बिच्छू एवं जहरीले कीड़े मकोड़े शरण ले रखे हैं। हद तो तब हो गया कि बुधवार की दिन सोनपुर के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी श्रीमती शबीना अहमद अपने कार्यालय में सभी कर्मचारियों के साथ काम में व्यस्त थी।

इसी बीच किसी काम को लेकर सीडीपीओ ने अपने अधीनस्थ इंद्रजीत नाम के कर्मचारी को एक फाइल लाने का आदेश दी। इनके आदेशानुसार उक्त कर्मचारी यूं ही फाइल उठाना चाहा वैसे ही साँप के फुफकार से कर्मचारियों में दहशत फैल गयी। इस स्थिति को देखकर कार्यालय में कार्यरत सभी कर्मचारियों में भयव्याप्त होकर कार्यलय से भाग निकले। उसी में कुछ साहसी कर्मचारी ने लाठी लेकर उक्त सांप को मारने में सफल रहा।

इस स्थिति को देखकर सीडीपीओ ने भावुक होकर पत्रकार को बताया कि एक ही कमरे में वाल विकास परियोजना के कार्य व समानों के रखने के कारण जगह की कमी होने से साफ-सफाई पूर्ण ढंग से नही हो पाती हैं जिसके कारण कार्यलयों में जहरीले जनवरो का वास होने से कभी भी एक बड़ी हादसा हो सकती हैं।

सबसे ज्यादा कठिनाइयों का सामना उस वक्त होती हैं जब कोई अधिकारी या आंगनबाड़ी से संबंधित महिलाएं काम करने वाली आती हैं तो बैठने तक की व्यवस्था नही है।

जिस तरह से पूरे प्रखंड भर के कार्य चलती हैं उसके हिसाब से यहां जगह बहुत कम है। एक ही रूम में पूरे प्रखंड का काम चलाया जा रहा है ना तो पैर रखने का जगह है ना बैठने का जगह।

सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना उस वक्त होती हैं जब कभी महिलाओं को शौच या शुद्ध पानी पीने की व्यवस्था नही रहने से काफी परेशानी उठानी पड़ती हैं।

उन्होंने यह भी बतायी कि हल्की सी बारिश पड़ने पर भी इस कार्यालय का छत से पानी गिरना शुरू हो जाता है जिसके कारण फाइल जो बहुत महत्वपूर्ण है वह पानी से भीग जाने के कारण बर्बाद हो जाता है।

सर्वाधिक दुःख की बात उन्होंने बताया कि प्राकृतिक रूप से महिलाओं का जो निर्धारित पर धर्म का आगमन होता है उस धर्म की स्थिति में महिलाओं को काफी परेशानी महसूस करनी पड़ती हैं।

सीडीपीओ ने बताई की सालाना करोड़ों रुपए का खर्च कार्यालय में इस विभाग पर हो रहा है लेकिन इस विभाग का ना पूर्ण व्यवस्था के साथ कार्यालय है जिसके कारण सैकड़ो महिलाएं से लेकर पुरुष कर्मचारियों को बैठने व कार्यालय के समाग्री रखने की व्यवस्था है।

इस समस्याओं की जनकारी स्थानीय अधिकारियों से लेकर विभागीय अधिकारियों को अवगत करवाया गया लेकिन अभी तक कोई भी पहल इस पर नही की गयी। परिणाम स्वरूप जो स्थिति है इसी में हम लोग काम करने को मजबूर है लगता है कभी भी बड़ी हादसा हो सकता है।

इस समस्या से लगता है कि आलाधिकारियों एक बड़ी हादसा के इंतजार कर रहे हैं तभी तो इस तरह की समस्याओं से अनभिज्ञ रह रहे हैं ।

Source: RAJESH KUMAR BIHAR