सुपौल जिला स्थित सदर प्रखंड सुखपुर गांव में सार्वजनिक दुर्गा मंदिर, सुखपुर(सुपौल) पिछले वर्षों के भांति इस वर्ष भी परम भव्यता और पवित्रता से दुर्गा पूजा का आयोजन किया है।हिन्दू मान्यताओं में स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, कहते हैं कि जो भक्त सच्चे मन और पूरे विधि-विधान से स्कंदमाता की पूजा करता है उसे ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है।सार्वजनिक दुर्गा मंदिर के आचार्य पंडित श्री सुरेश झा ने बताया कि जगत जननी मां दुर्गा को आदिशक्ति, प्रधान प्रकृति, गुणवती योगमाया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकार रहित बताया गया है। नवरात्रि के पांचवें दिन महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती के पांचवें स्वरूप माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है। पंडित श्री सुरेश झा ने कहा कि कहा कि देवी ही प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से संपूर्ण ब्रह्मांड की सृष्टि और लय का कारणभूता है। नवरात्रि-पूजन के पांचवें दिन का शास्त्रों में पुष्कल महत्व बताया गया है। इस चक्र में अवस्थित मन वाले साधक की समस्त बाह्य क्रियाओं एवं चित्तवृत्तियों का लोप हो जाता है। वह विशुद्ध चैतन्य स्वरूप की ओर अग्रसर हो रहा होता है। साधक का मन समस्त लौकिक, सांसारिक, मायिक बंधनों से विमुक्त होकर पद्मासना मां स्कंदमाता के स्वरूप में पूर्णतः तल्लीन होता है।इस समय साधक को पूर्ण सावधानी के साथ उपासना की ओर अग्रसर होना चाहिए। उसे अपनी समस्त ध्यान-वृत्तियों को एकाग्र रखते हुए साधना के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। मां स्कंदमाता की उपासना से भक्त की समस्त इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं। श्री झा ने सभी भक्तों से अपील करते हुए कहा है कि हमें नवरात्र आराधना के साथ हमें कोरोना महामारी को भूलना नहीं चाहिए हम सबों सामाजिक दूरी का पालन करते हुए माता का पूजन-दर्शन करना होगा और आदिशक्ति माँ जगदंबा से करोना मुक्ति के लिए विनती करना चाहिए।उन्होंने कहा कि कोरोना से रक्षा हेतु सरकार के दिशानिर्देशन के साथ नवरात्र-पूजन भी पूरे विधि-विधान व परंपरागत तरीके से होगी।Report by: Chandan kumar Post navigationजेडीयू नेता वसीम अहमद अलीग ने आसमां परवीन के समर्थन मे किया दौरा जवाहर नवोदय विद्यालय की कक्षा 6 सत्र 2021 – 22 में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन हुआ शुरू