नई दिल्ली. बीते एक साल से देश के ऑटो सेक्टर (Auto Sector) में लगातार संकट का दौर देखने को मिला है. भारत की आर्थिक सुस्ती की पीछे एक बड़ा वजह यह भी बताया गया कि ऑटो सेक्टर में का दौर चल रहा है. इसी बीच अब प्रदूषण के स्तर का देखते हुए सरकार ने फैसला लिया है कि 1 अप्रैल 2020 से BS6 एमिशन स्टैंडर्ड (BS6 Emmision Standard) को लागू किया जाएगा. प्रमुख तेल उत्पादन कंपनियां भी नए BS6 इंजन के लिए अपने रिफाइनरीज़ को अपग्रेड कर BS6 ईंधन उपलब्ध कराने के लिए तैयारी है. साथ ही मोटर व्हीकल कंपनियां भी इसके लिए तैयारियों जुटी हुई हैं. वर्तमान में BS4 एमिशन स्टैंडर्ड लागू है. बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने BS5 एमिशन स्टैंडर्ड को छोड़कर BS6 को लागू करने का फैसला लिया है. ऐसे में BS6 स्टैंडर्ड को लेकर आम लोगों के मन में कई तरह की बातें हैं, जिनके बारे में हम आपको जानकारी देने जा रहे हैं…

आमतौर पर माना जाता है कि जिस ईंधन में सल्फर (Sulphur Content in Fuel) की मात्रा जितनी कम होगी, वो ईंधन उतना ही साफ और प्रदूषण के लिहाज से बेहतर होगा. सल्फर कम होने की वजह से ईंधन के उत्सर्जन में NOx और कार्बन मोनाऑक्साइड (CO) और हाइड्रोकॉर्बन की मात्रा कम होगी. रिपोर्ट्स में दावा किया जा चुका है कि BS4 ईंधन में 50 फीसदी पार्टिकुलेट मैटर पाया जाता है. हालांकि, ईंधन की सल्फर कंटेट की मात्रा होना भी एफिसिएंसी के लिए जरूरी होता है.

क्या BS6 इंजन BS4 ईंधन पर काम करेगा?
उत्सर्जन स्तर का स्तर तभी मेंटेन किया जा सकेगा, जब BS6 इंजन में BS6 ईंधन का ही प्रयोग किया जाए. अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो प्रदूषण के लिहाज से कोई फायदा नहीं है. हालांकि, एक BS6 इंजन की कार BS6 ईंधन पर काम कर सकती है. लेकिन, यह BS6 एमिशन स्टैंडर्ड के अनुपालन में नहीं होगा.
क्या है BS6 ईंधन महंगा होगा?
नए स्टैंडर्ड के आधार पर ईंधन बनाने के लिए तेल रिफाइनरी कंपनियों को अपनी रिफाइनरीज को अपग्रेड करना पड़ा है. इस अपग्रेडेशन पर होने वाले खर्च का कुछ बोझ रिटेल कस्टमर्स पर डाला जाएगा. कई प्रमुख कंपनियों ने इस बारे में जानकारी दी है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि BS6 स्टैंडर्ड वाले ईंधन की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी ही होगी.

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By WC News

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