Deepak Kumar गायघाट। जिला पदाधिकारी के निर्देश पर बुधवार को ग्रामीण चिकित्सकों के बीच जापानी बुखार पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया।प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रभारी चिकित्सक पदाधिकारी योगेश नरायण ने बताया कि डब्लूएचओ के मुताबिक, इस बीमारी का पहला मामला साल 1871 में सामने आया था। मच्छरों से फैलने वाला ये वायरस डेंगू, पीला बुखार, और पश्चिमी नील वायरस की प्रजाति का ही है।

क्या है इन्सेफलाइटिस: जापानी बुखार इन्सेफ्लाइटिस एक जानलेवा बीमारी है।जिला केयर के संजीव कुमार ने बताया कि यह एक ऐसी गंभीर बीमारी है ।जिसमें आपके दिमाग में सूजन आने लगती है। इसके लिए आपातकालीन इलाज की जरूरत होती है। इस बीमारी का शिकार कोई भी हो सकता है लेकिन सबसे ज्यादा ख़तरा बच्चों और बूढ़ों को होता है।

जापानी इन्सेफ्लाइटिस के लक्षण:
जापानी इन्सेफ्लाइटिस में बुखार होने पर बच्चे की सोचने, समझने, और सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। तेज बुखार के साथ बार- बार उल्टी होती है। यह बिमारी अगस्त , सितंबर और अक्टूबर माह में ज्यादा फैलता है और 1 से 14 साल की उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में लेता है।जापानी इन्सेफ्लाइटिस से बचाव के उपाय
नवजात बच्चे का समय से टीकाकरण कराएं साफ सफाई का ख़ास ख्याल रखे गंदे पानी को जमा ना होने दे साथ ही साफ और उबाल कर पानी पियें बारिश के मौसम में बच्चों को बेहतर खाना दें हल्का बुखार होने पर डॉक्टर को दिखाए। इस दौरान मौके पर यूनिसेफ के देवेन्द्र कुमार, बीएमसी वीरेन्द्र कुमार ठाकुर, आशा कोरडिनेटर मुकेश कुमार समेत कई लोग उपस्थित थे।

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By WC News

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