श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे इस वक्त पांच दिवसीय दौरे पर भारत आए हुए हैं। 
महिंदा राजपक्षे ने सीए का समर्थन किया है और  कहा कि  “यह भारत का आंतरिक मसला है।श्रीलंका के लोग जब चाहे लौट सकते हैं। उनके घर वहां है वह जब चाहे वापस आ सकते हैं। हमें कोई दिक्कत नहीं है। हाल ही में 4000 लोग वापस लौटे हैं। यह सब इस पर निर्भर करता है कि वह क्या चाहते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका में महिंदा राजपक्षे को सत्ता में लौटने के बाद तमिल और मुस्लिम अल्पसंख्यकों में डर का माहौल बन गया है।
महिंदा राजपक्षे ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। मुलाकात के दौरान कई द्विपक्षीय मुद्दे पर भी बातचीत हुआ। द्विपक्षीय मुद्दे पर बातचीत करने के बाद महिंदा राजपक्षे ने कहा कि वह इस बात को लेकर आश्वस्त है कि प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे की सरकार संगठित श्रीलंका में तमिल लोगों की आकांक्षाओं को पूरी करेंगे।
श्रीलंकाई प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने यह भी कहा कि वह इस बात को लेकर आश्वस्त है कि श्रीलंका सरकार संगठित श्रीलंका में समानता न्याय शांति सम्मान के लिए तमिल लोगों की आकांक्षाओं को पूरी  करेगी।
महिंदा राजपक्षे ने अल्पसंख्यक समुदाय के कथित भय को खारिज करते हुए कहा कि हम लोग भाई जैसे हैं। एक श्रीलंकाई के तौर पर हम उन्हें बराबरमानते हैं चाहे वह अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक। इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता चाहे वह मुस्लिम हो या हिंदू या बौद्ध इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हम लोग कभी भेदभाव नहीं करेंगे।

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