चमकी वार्ड के डॉक्टरों को मिला जेई और एईएस पर प्रशिक्षण…

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– लक्षण आधारित ईलाज करने की दी सलाह
– एमओआइसी मेडिकल ऑफिसर को देगें प्रशिक्षण

सीतामढ़ी: जिले में चमकी और जेई पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला समाहरणालय के सभागार में सदर तथा चमकी वार्ड के डॉक्टरों को शुक्रवार को प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण सह समीक्षात्मक बैठक की अध्यक्षता सिविल सर्जन ने की । प्रशिक्षण केयर के डॉ मेंहदी हसन ने दिया। प्रशिक्षण में मेंहदी हसन ने एईएस के इलाज में तकनीकी पक्ष को रखा। वहीं संचारी रोग रोकथाम नियंत्रण पदाधिकारी डॉ रविन्द्र कुमार यादव ने बैठक डाक्टरों को बताया कि किस तरह वे लक्षण आधारित ईलाज करें। उन्होंने बताया कि अगर उनके स्वास्थ्य केंद्र पर कोई भी मरीज आए तो उनका लक्षण आधारित ईलाज की करें। अगर उन्हें बुखार है या चमकी है या हाइपोग्लेसेमिया है तो उनका लक्षण आधारित ईलाज करें। ईलाज में पूरी तरह से प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करें। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर सभी एमओआइसी अपने स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिसर को प्रशिक्षण देगें। प्रशिक्षण में डीएस डॉ शकील अंजुम, डॉ हिमांशु शेखर, डॉ पियुष राज, डॉ विनय कुमार सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एमओआईसी उपस्थिति थे।
क्या हैं चमकी बुखार के लक्षण?
चमकी नाम की बीमारी में शुरुआत में तेज बुखार आता है.
इसके बाद बच्चों के शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है.
इसके बाद तंत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है.
इस बीमारी में ब्लड शुगर लो हो जाता है.
बच्चे तेज बुखार की वजह से बेहोश हो जाते हैं और उन्हें दौरे भी पड़ने लगते हैं.
जबड़े और दांत कड़े हो जाते हैं.
बुखार के साथ ही घबराहट भी शुरू होती है और कई बार कोमा में जाने की स्थिति भी बन जाती है.
अगर बुखार के पीड़ित को सही वक्त पर इलाज नहीं मिलता है तो मौत तय है.
अगर चमकी बुखार हो जाए तो क्या करें?
बच्चों को पानी पिलाते रहे, इससे उन्हें हाइड्रेट रहने और बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी.
तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें.
पंखे से हवा करें या माथे पर गीले कपड़े की पट्टी लगायें ताकि बुखार कम हो सके.
बच्चे के शरीर से कपड़े हटा लें एवं उसकी गर्दन सीधी रखें.
बच्चों को पारासिटामोल की गोली व अन्य सीरप डॉक्टर की सलाह के बाद ही दें.
अगर बच्चे के मुंह से लार या झाग निकल रहा है तो उसे साफ कपड़े से पोछें, जिससे सांस लेने में दिक्कत न हो.
बच्चों को लगातार ओआरएस का घोल पिलाते रहें.
तेज रोशनी से बचाने के लिए मरीज की आंख को पट्टी से ढंक दें.
बेहोशी व दौरे आने की अवस्था में मरीज को हवादार जगह पर लिटाएं.
चमकी बुखार की स्थिति में मरीज को बाएं या दाएं करवट लिटाकर डॉक्टर के पास ले जाएं.
अगर आपके बच्चे में चमकी बीमारी के लक्षण दिखें तो
सबसे पहले बच्चे को धूप में जाने से रोकें.
बच्चा तेज धूप के संपर्क में आया तो उसे डिहाईड्रेशन की समस्या होगी, जिससे बीमारी की गंभीरता बढ़ती है.
बच्चों को दिन में दो बार स्नान कराएं.
गर्मी के समय बच्चों को ओआरएस अथवा नींबू-पानी-चीनी का घोल पिलाएं.
रात में बच्चों को भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं.
चीनी-नमक का घोल, छाछ, शिकंजी के अलावा तरबूज, खरबूज, खीरे जैसी चीजों का खूब सेवन करें.